भूतिया हॉस्पिटल | Bhoot Ki Kahani

Hospital Bhoot Ki Kahani
Hospital Bhoot Ki Kahani

हॉस्पिटल एक ऐसी जगह है जहां पर हम बिमारी के वक्त ये सोचकर जाते है कि डॉक्टर कुछ ना कुछ इलाज जरुरु कर देंगे। लेकिन एक हॉस्पिटल किसी डॉक्टर के लिए भूतिया जगह बन सकता है ये कौन सोच सकता है। आज की कहानी ऐसे ही हैदराबाद में हुई सच्ची घटना पर आधारित है। आप पढ़ रहे है Hospital Ke Bhoot Ki Kahani

 

26 साल की डॉक्टर मारवा सामर एमबीबीएस की इंटर्नशिप के चलते नाईट ड्यूटी के लिए हॉस्पिटल में तैनात थी। उसके साथ उसकी दो बैचमेट्स नव्या और राफिया भीनाईट शिफ्ट के लिए हॉस्पिटल में थे। क्लास के दौरान उन्होंने बेसमेंट के एक भूतिया कमरे के बारे में बहुत सुना था। 

 

कहते है वहां पहले psychiatric ward हुआ करता था लेकिन एक आदमी के वहां आत्महत्या करने के बाद उस जगह  पर अजीबो गरीब घटनाएं होने लगी जिसकी वजह से उस पूरे बेसमेंट को बंद कर दिया गया था। और उसकी चाबी वहां के सिक्योरिटी गॉर्ड अहमद चाचा के पास रहती थी। वहां पर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं थी।

 

 मारवा, नव्या और राफिया नए इंटर्न्स थे तो पढाई के साथ साथ कुछ नया करने की सोचते रहते थे। एक रात जब हॉस्पिटल में ज्यादा मरीज नहीं थे तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना बेसमेंट में जाकर उस जगह की पड़ताल की जाए। किसी तरह उन्होंने छुपकर अहमद चाचा से बेसमेंट की चाबी ले ली और बेसमेंट की तरफ चल दिए। आप पढ़ रहे है Hospital Ke Bhoot Ki Kahani

 

बेसमेंट का दरवाजा खोलकर जब वो निचे उतरने लगे तो घूर अँधेरा देखकर नव्या घबरा गयी और उसने उनको वापस चलने के लिए कहा लेकिन कोई नहीं माना। जैसे जैसे वो निचे उतर रहे थे नव्या का मन घबरा रहा था लेकिन उसे कोई डरपोक ना समझे इस डर से उसने किसी को कुछ नहीं कहा। उस लम्बे से बरामदे के एक कमरे ली लाइट चसबुझ कर रही थी। तीनो घबराकर कमरे तक पहुंचे। 

 

हर तरफ से वो जगह बंद होने की बावजूद वहां पर जोर से हवा चल रही थी। नव्या को एक खिड़की के शीशे के प्रतिबिंब में पंखे से लटका एक आदमी दिखाई दिया। वो जोर से चीख पड़ी। उसके चीखते ही वो आदमी गायब हो गया। मारवा और राफिया उसके डर को देखकर जोर जोर से हंसने लगे लेकिन नव्या फिर से उन्हें कुछ नहीं बोल पायी। 

 

मारवा और राफिया उस कमरे में और अंदर जाने लगे लेकिन नव्या को ठण्ड लगने लगी और वो कमरे से बहार आ गयी। बहार आते ही नव्या को ऐसा लगा की मानो उसका पैर किसी ने जोर से पकड़ लिया हो। नव्या जोर से चीख पड़ी। इस से पहले कि मारवा और राफिया कुछ कर पाते उन्होंने देखा कि एक डरावना सा आदमी नव्या को घसीटता हुआ बरामदे के अंत तक ले जा रहा है। आप पढ़ रहे है Hospital Ke Bhoot Ki Kahani

 

वो जैसे ही नव्या की तरफ भागे उस रूम का दरवाजा बंद हो गया और वो दोनों उस से बहार नहीं निकल पा रहे थे। अचानक साड़ी लाइट्स बंद हो गयी। उन्होंने दोबारा दरवाजा खोलने की कोशिश की तो वो आसानी से खुल गया। बेसमेंट में एकदम अँधेरा था और मारवा और राफिया को कुछ समझ नहीं आ रहा था। 

 

उन्होंने जब अपनी टोर्च जलाई तो उन्हें ऐसा लगा जैसे एक साया बरामदे में घूम रहा हो। वो साया पास आते ही दोनों बहुत जोर से चीखे और बेसमेंट से भाग निकले। ऊपर जाकर उन्होंने अहमद चाचा और बाकी कुछ लोगो की मदद से नव्या को बेसमेंट से बाहर निकालकर ऊपर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। नव्या बिलकुल ठंडी पड़ी थीऔर कुछ कुछ बड़बड़ा रही थी। 

 

सारे डॉक्टर्स ये देखकर आश्चर्यचकित थे। नव्या उस रात से 6 महीने थक कोमा में रही और होश में आये के बाद उसने किसी को भी उस रात के बारे में कुछ नहीं बताया। मारवा और राफिया उस रात की शरारत के लिए आज भी खेद प्रकट करती है। आप पढ़ रहे है Hospital Ke Bhoot Ki Kahani

 

आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं। 

 

Story By : Khooni Monday 

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