जुड़वाँ परियां | Pariyon Ki Kahani

Judwa Pariyon Ki Kahani
Judwa Pariyon Ki Kahani

एक बार परीलोक में एक अद्भुत करिश्मा हुआ। नीलम पारी के घर दो जुड़वाँ बच्चियाँ पैदा हुई। दोनों लाल और नीले पंखो के साथ पैदा हुई थी। आज तक परीलोक में ऐसा नहीं हुआ था। दोनों बच्चे स्वस्थ और ख़ूबसूरत थे लेकिन उनका शरीर दाहिनी और से आपस में जुड़ा हुआ था। [ आप पढ़ रहे है Judwa Pariyon Ki Kahani ]

धीरे धीरे वो दोनों बड़ी होने लगी। वो दोनों एक साथ खेलती, खाती-पीती थी। दोनों एक दूसरी की बहुत अच्छी सहेलियां भी बन गयी थी। लेकिन जब वो व्यस्क हुई तो उसके लिए एक ऐसा लड़का ढूँढा जाने लगा जो दोनों से ही विवाह कर ले। आखिर पृथ्वीलोक पर रहने वाला सरस देश का राजा इसके लिए मान गया और उसने उन दोनों से विवाह कर लिया।

एक बार नीली पारी की राजा से लड़ाई हो गयी। क्योकि उसे धरती लोक अच्छा नहीं लगता था और वो वापस परीलोक जाना चाहती थी। और उसने वापस परीलोक जाने का निर्णय ले लिया। लाल पारी इस बात से धर्मसंकट में पड गयी क्योंकि वो अपने पति को छोड़कर जाना नहीं चाहती थी। [ आप पढ़ रहे है Judwa Pariyon Ki Kahani ]

लाल परी ने नीली को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी। फिर राजा ने सोचा की क्यों ना राजवैद्य की मदद ली जाए। उसने साड़ी बात राजवैद्य को बताई। तो राजवैद्य ने बताया कि इसमें मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता लेकिन ढालू पर्वत पर रहने वाली गौरिका जादूगरनी आपकी मदद कर सकती है।

राजा ने गौरिका को बुलाने के लिए सैनिक भेजे। जब गौरिका राजा से मिलने आई तो उसने बताया की राजन मैं सिर्फ इतना कर सकती हूँ किसी एक परी को दूसरी के शरीर में मिला दूँ। आप बताइये आप किस परी के साथ रहना चाहते है। राजा बोले के मैं लाल परी के साथ रहना चाहता हूँ। जादूगरनी ने तुरंत नीली परी को लुप्त कर दिया।

अब नीली परी दिख नहीं रही थी लेकिन वो लाल के अंदर ही जीवित थी। राजा ने सोचा की समस्या का हल हो गया लेकिन समस्या अब और भी बढ़ गयी थी। अब नीली क्रोध के कारण लाल को राजा से बात नहीं करने देती और लाल के साथ लड़ाई करने लगी। लाल का मन नहीं लगता था तो राजा ने थक हारकर उसे परीलोक वापस भेज दिया। [ आप पढ़ रहे है Judwa Pariyon Ki Kahani ]

काफी दिन बीत गए लेकिन लाल की नीली के साथ दिमागी लड़ाई खत्म नहीं हुई। लाल खाना खाती तो नीली उसके पेट में खाना नहीं जाने देती। लाल के पंखो पर भी नीली झलक दिखाई देती थी। सीढ़ी साधी लाल अपनी बहिन नीली को खुश करने के लिए खुद को भूलती जा रही थी।

परी रानी को जब ये पता चला तो उसने नीली को लाल के अंदर से बहार निकाल दिया। परी रानी बोली कि मैं तुम दोनों को अलग कर सकती हूँ लेकिन फिर तुम दोनों में से सिर्फ एक ही जिन्दा रह सकती है बताओ तुम में से किसे जिन्दा रहना है। नीली बोली “लाल तो पहले ही मुझे मार चुकी है अब मेरी बारी है”। परी रानी ने तलवार लेकर दोनों को अलग कर दिया। [ आप पढ़ रहे है Judwa Pariyon Ki Kahani ]

लाल परी से अलग होकर नीलम परी उड़ गयी और लाल पारी उसकी सलामती की दुआ मांगने लगी। लाल का ये बलिदान देखकर रानी माँ बहुत खुश हुई और उन्होंने लाल को भी जीवदान दे दिया। अब लाल पारी वापस अपने पति के पास चली गयी। और अब लाल पारी और राजा दोनों खुशहाल जीवन बिताने लगे।

Story By : New Moon Stories

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