स्कूल लाइब्रेरी | Bhoot Ki Kahani

School Library - Bhoot Ki Kahani
School Library - Bhoot Ki Kahani

वैसे तो स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। लेकिन सोचिये की अगर उसी मंदिर में किसी भूत या प्रेत का साया हो तो वहाँ पर पढ़ने वाले बच्चो पर क्या बीतती होगी। आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी सुनाने जा रहे है। [ आप पढ़ रहे है School Library – Bhoot Ki Kahani ]

ये कहानी खुशबू और नादिया की है। वो दोनों एक ही स्कूल में पढ़ती थी। दोनों बहुत अच्छी दोस्त भी थी। स्कूल में सब कुछ बहुत अच्छा अच्छा था। अध्यापक भी बहुत अच्छे थे और पढाई भी अच्छी थी। लेकिन वहाँ की एक बात अच्छी नहीं थी कि अध्यापक के बिना स्कूल की लाइब्रेरी में बच्चो का जाना मना था। और कोई बच्चा गलती से अंदर ना चला जाए इसलिए वहाँ पर हमेशा ताला लगा रहता था। उस ताले की चाबी प्रिंसिपल के पास रहती थी। ये लाइब्रेरी बेसमेंट में थी।

सब बच्चे कहते थे की उस कमरे में भूत रहता है। लेकिन नादिया को लगता था की ये सब बच्चो को उस कमरे से दूर रखने के लिए कहानी बना रहे थे। उस कमरे में क्या है नादिया ये शुरू से जानना चाहती थी और वो खुशबू को उस कमरे में चलने के लिए बोलती रहती थी। पर खुशबू उसे ऐसा करने के लिए साफ़ मना कर देती है। [ आप पढ़ रहे है School Library – Bhoot Ki Kahani ]

एक दिन की बात है, नादिया स्कूल में जल्दी आ गयी। उस दिन स्कूल में गॉर्ड को छोड़कर और कोई भी नहीं आया था। वो वहाँ पर अकेली बोर हो रही थी इसलिए वो यहाँ वहाँ टहलते टहलते बेसमेंट की तरफ जाने लगी। जैसे ही नादिया लाइब्रेरी के दरवाजे के पास जाने के लिए बेसमेंट की सीढ़ियों से उतर रही थी, उसे कुछ आवाजे सुनाई देती है। वो आवाजे लाइब्रेरी से आ रही थी।

नादिया को लगा कि शायद लाइब्रेरी में कोई है जो किसी से बात कर रहा है। आगे जाते ही नादिया को लाइब्रेरी का दरवाजा खुला हुआ मिलता है। उसके मन के कई तरह के सवाल आ रहे थे। वो सोच रही थी थी ये लाइब्रेरी तो हमेशा बंद रहती है तो आज इसका ताला खुला हुआ कैसे है। उसने सोचा की शायद इसमें कोई इंसान है और वो भूत वाली डराने के लिए।

उसने इस मिस्ट्री का खुलासा करने की ठान ली और अंदर चली गयी। उसके अंदर जाते ही कमरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। नादिया ने दरवाजा की लेकिन वो दरवाजे को नहीं खोल पायी। इस तरह दरवाजा बंद डरी हुई थी और उसके पास दरवाजे के खुलने का इंतज़ार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। कमरे में सिर्फ एक हल्की रौशनी का बलबंजाल रहा था जिसकी रौशनी में कुछ साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। [ आप पढ़ रहे है School Library – Bhoot Ki Kahani ]

तभी नादिया को एक खिड़की दिखाई देती है और वो उस खिड़की से मदद के लिए चिल्लाने लगती है। इसी दौरान उसे पीछे की तारक कुछ भारी चीज गिरने की आवाज सुनाई देती है। उसके पीछे मुड़कर देखने पर उसने पाया की वहाँ पर राखी ही किताबे निचे गिरी हुई थी। अब नादिया को ये सब घटनाएं अपने आप होना बहुत ही डरावना लग रहा था क्योंकि कमरे में उसके अलावा और कोई नहीं था।

नादिया जैसे ही गिरी हुई किताबो को उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसे टेबल के निचे झुकी तो उसे सफ़ेद कपड़ो में एक औरत दिखाई दी। नादिया डरकर दरवाजे की तरफ भागने लगी और जो से दरवाजे को बजाने लगी। तभी पीछे से आवाज आई “कहाँ जा रही हो, यहाँ मेरे साथ नहीं रहना चाहोगी।” ये सुनकर नादिया ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो उसे सफ़ेद कपड़ो में एक डरावनी डायन दिखाई दी।

उसे देखकर नादिया की चीखे निकल गई और वो बेहोश होकर गिर गयी। उसकी चीखो की आवाज गॉर्ड ने सुन ली और जब वो लाइब्रेरी के पास पंहुचा तो लाइब्रेरी का ताला बंद था। गॉर्ड ने उस ताले को तोडा और नादिया को बहार निकाल लिया और जाकर साड़ी बात प्रिंसिपल को बता दी। अब लाइब्रेरी के साथ साथ बेसमेंट ताला बंद रहने लगा। [ आप पढ़ रहे है School Library – Bhoot Ki Kahani ]

Story By – ToonGiri

आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट कर के जरूर बताएं

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