टिकटोक की खौफनाक दुनिया | Moral Stories in Hindi

Moral Story In Hindi
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किसी शहर में ख़ुशी नाम की एक 12 साल की बच्ची अपनी माँ सुमन और अपने पिता अजय के साथ रहती थी। ख़ुशी काफी शैतान बच्ची थी। वो काफी ज़िद्दी भी थी। उसे जो चीज चाहिए थी वो लेकर ही रहती थी। चाहे उसे कुछ भी करना पड जाए। हमेशा की तरह ख़ुशी टूशन जाती है जहाँ वो देखती है कि उसकी दस्त रेशमा के पास एक नया फ़ोन है जिसमे वो किसी टिकटोक ऐप्प का इस्तेमाल कर रही थी।

तभी वो अपनी दोस्त से बोलती है “अरे वाह नया फ़ोन Congrats “
रेशमा – थैंक्स
ख़ुशी – कब लिया तूने ये फ़ोन
रेशमा – कल ही
ख़ुशी – इतनी जल्दी तुझे फ़ोन मिल भी गया, तेरे पेरेंट्स ने कुछ नहीं कहा
रेशमा – उन्होंने ही तो मुझे नया फ़ोन लाकर दिया। और देख एक नयी ऐप्प टिकटोक है अगर इस पर कोई फेमस हो जाए तो उसे पॉपुलैरिटी के साथ साथ पैसे भी मिलते है
ख़ुशी – अच्छा?
रेशम – हाँ इस पर ऐसे काफी बच्चे है जो हमारी उम्र के है और लाखो रुपए कमा रहे है। इसलिए मेरे पेरेंट्स ने ये फ़ोन लाकर दे दिया
ख़ुशी – वाह यार तेरे पेरेंट्स तो बोहोत ही ओपन माइंडेड है
रेशमा – वो तो है ही। पर अभी मैं घर जा रही हूँ मुझे आज टिकटोंक पर बोहोत सारे वीडियोस अपलोड करने है। बाय ख़ुशी

पॉपुलैरिटी और लाखो रुपए कमाने वाली बात को सुनकर ख़ुशी भी फ़ोन लेने की ठानती है और अपने घर जाती है। जब रात को सब एक साथ बैठे होते है तब ख़ुशी बोलती है

ख़ुशी – पापा पापा मुझे एक फ़ोन चाहिए
पापा – पहले थोड़ी बड़ी हो जाओ फिर फ़ोन की बात करना
ख़ुशी – नहीं, मुझे तो अभी चाहिए। मेरी दोस्त रेशमा को तो उसके पेरेंट्स ने खुद ही नया फ़ोन लेकर दिया है
पापा – हाँ दिया होगा पर तुम्हे नहीं मिलेगा
ख़ुशी – ठीक है तो जब तक मुझे नया फ़ोन नहीं मिल जाता तब तक मैं कुछ नहीं खाउंगी
पापा – ठीक है जब भूख लगेगी तो खुद दिमाग ठिकाने आ जायेगा

नए फ़ोन की चाहत में ख़ुशी अनसन पर बैठ जाती है। पूरा दिन भूखी रहने के बात उसकी माँ सुमन उसके लिए खाना लेकर आती है लेकिन ख़ुशी खाना खाने से साफ़ मन कर देती है। एक दिन और भूखी रहने के बाद खुशी की जिद को देखते हुए पापा अजय को फ़ोन लाकर देना पड़ता है। फ़ोन को देखकर ख़ुशी बोहोत खुस होती है और टिकटोक डाउनलोड कर लेती है। कुछ दिनों में वो वीडियोस भी बनाने लगती है। वो टिकटोक की दुनिया में इतनी खो जाती है कि उसके आसपास की दुनिया में क्या हो रहा है दिखाई नहीं देता।

एक दिन वो सोचती है कि मेरी वीडियोस में क्रिएटिविटी कम है, क्यों ना मैं कुछ ऐसा करूँ जिसे देखकर लोग मेरे टैलेंट की कद्र करने लग जाए। तभी खुसी और एक विचार सूझता है कि क्यों ना मैं अपनी छत पर जाकर डांस परफॉरमेंस का एक वीडियो बनाऊं। ऐसा करने से मेरे लाइक्स भी बढ़ जाएंगे और पॉपुलैरिटी भी मिल जायेगी।

अगले दिन ख़ुशी तैयार होकर अपने घर की सबसे ऊँची छत पर जाकर वीडियो बनाना शुरू कर देती है। लेकिन डांस करते करते उसका पैर फिसल जाता है और वो छत से निचे गिर जाती है और बेहोस हो जाती है। जब उसकी आँख खुलती है तो वो अपने आप को हॉस्पिटल में पाती है जहाँ पर उसके मम्मी पापा खड़े होकर रो रहे होते है। ये देखकर ख़ुशी बोलती है

ख़ुशी – क्या हुआ मम्मी आप रो क्यूँ रही हो
मम्मी – तुम्हे हमने कई बार कहा था कि फ़ोन का इतना इस्तेमाल मत करो। देखा तुम्हारे साथ कितना बुरा हो गया।

ख़ुशी को पता चलता है कि उसके दोनों पैरो में फ्रैक्चर हो गया है और अब उसके ठीक होने में महीनो लग जाएंगे। अब उसे एकसास होता है की वो कितनी बड़ी गलती कर रही थी।

तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि ज्यादा पाने की चाहत में हमें वो नहीं खोना चाहिए जो हमारे पास पहले से ही है, जैसे की हमारा स्वास्थ्य और हमारा बचपन दोबारा लौटकर वापस नहीं आ सकता।

Story By : Maha Cartoon Tv

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2 Responses

  1. 4th February 2020

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  2. 4th February 2020

    […] टिकटोक की खौफनाक दुनिया […]

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